- Bollywood’s Favourite Jodi - Saifu and Bebo lagayenge Hasi Ke Tyo-Ha-Ha-Har mein chaar chaand only on The great Indian Kapil Show
- Disha Patani leaves fans curious as she drops a series of cryptic stories: There are humans amongst us
- It’s October Season! 7 Bollywood Actors Who Are Your Libra–Scorpio Twins — Rekha, Aditi Rao Hydari to Kunal Kapoor
- मिराया होटल एंड रिज़ॉर्ट्स ने धनंजय श्रीवास्तव को क्लस्टर जनरल मैनेजर नियुक्त किया
- भारत की नंबर 1 EV अब INDULGE के लिए तैयार है!
‘हम डर से किसी भाषा को जिंदा नहीं रख सकते’ – हिंदी-मराठी विवाद पर शिखर पाहाड़िया का बयान
महाराष्ट्र में हिंदी और मराठी के बीच बढ़ते तनाव पर शिखर पाहाड़िया ने अपनी राय रखी है। जब मुंबई और पुणे में कुछ राजनीतिक पार्टी कार्यकर्ता मराठी न बोलने वालों के खिलाफ हिंसक कदम उठा रहे हैं, तब शिखर ने एक पोस्ट में कहा कि किसी भाषा को डर के जरिए जिंदा नहीं रखा जा सकता।
उन्होंने लिखा, “अस्मिता यानी अपनी पहचान और स्वाभिमान, हमें जोड़नी चाहिए, तोड़नी नहीं चाहिए। इससे हमें गर्व महसूस होना चाहिए, घमंड या भेदभाव नहीं। हम भारत के किसी भी कोने से हों, कोई भी भाषा बोलते हों, हमारी अस्मिता हमें जोड़ती है। मराठी अस्मिता भी असली है, बहुत गहरी और हमारे जीवन से जुड़ी हुई है।”
शिखर ने कहा कि हर भाषा को बचाना जरूरी है, लेकिन इसके लिए किसी की इज्जत को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए।
“मैं खुद सोलापुर का हूं, इसलिए ये बात अच्छे से समझता हूं। भाषा ही हमें बनाती है। इसी से हमारे राज्य, हमारी कहानियां बनीं। इसी ने हमें कवि, गीत और क्रांतियां दी हैं। मराठी भी इसका हिस्सा है। इसे संभालना, बचाना और आगे बढ़ाना जरूरी है। लेकिन ये गर्व दूसरों की बेइज्जती कर के नहीं होना चाहिए। खासकर उन लोगों की, जो ईमानदारी से मेहनत कर रहे हैं।”
उन्होंने प्रवासियों (माइग्रेंट्स) का जिक्र करते हुए कहा, “बहुत से लोग काम की तलाश में दूसरे शहरों में जाते हैं। मराठी बोलने वाले भी दिल्ली, कोलकाता या चेन्नई में जाते हैं। सोचिए, अगर वहां उन्हें उनकी भाषा के लिए नीचा दिखाया जाए तो हमें कैसा लगेगा? जब लोग अपने परिवार से दूर मेहनत कर रहे हैं, तब उनके साथ हिंसा कर के भाषा थोपना गलत है। मुंबई में लोग हिंदी, तमिल या गुजराती बोलते हैं, इसमें कोई बुराई नहीं। असली दुख ये सोचना है कि इससे मराठी को खतरा है। हम डर से किसी भाषा को जिंदा नहीं रख सकते।”
अंत में उन्होंने कहा, “मुंबई, महाराष्ट्र और भारत उन सबका है जो इज्जत से जीते हैं, ईमानदारी से काम करते हैं और नम्रता से बात करते हैं, चाहे वे कोई भी भाषा बोलते हों। हमारी मराठी अस्मिता धमकियों से नहीं, अपनाने से और लोगों को जोड़ने से चमकेगी। मराठी को बचाना है तो उसे सेलिब्रेट करें, हथियार मत बनाइए।”


